Jai Maa Manila Devi!
हिंदी
Maa Manila Devi Temple set against the Himalayan peaks of Kumaon
॥ जय माँ मानिला देवी ॥

Bhajan & Verse

Traditional Kumaoni songs sung in praise of Maa Manila Devi.

Aastha Ke Swar

Generations of Devotion in Song

These beloved bhajans and poems - composed in the Kumaoni tongue and preserved in Manila Darpan (2019) - carry the faith of generations to the feet of the goddess.

म्येरि मानिलै डानि

म्येरि मानिलै डानि

म्येरि मानिले डानि हम त्येरी बल्याई ल्यूंला।

तू भगवती छ भवानी हम त्येरी बल्याई ल्यूंला॥

ककलासौ, बासोट, सोनी, बिनेका उछ्यॉणि,

दूनगिरि, नैधणा, पाली पूरबा उज्यॉणि।

खुटा धुँच गंगा को पांणी, हम त्येरी बलाई ल्यूंला॥

पश्चिमै सरहद परी गढ़वालाक दुसान,

धूमाकोटा, देवायला, गुलारका डान।

यॉंका वीर सल्टिया मानी हम त्येरी बल्याई ल्यूंला॥

मली पूजिया दूदातोली, जौरासी, देघाट,

सराईखेत, मट्यव, स्याल्दे, चौकोटकि फाट।

डानि सब त्यकैंणी चानी हम त्येरी बलाई ल्यूंला॥

तली पूजिया भूमिया थाना हरुहीत थात,

रामनगर, भौनखाल, छतेड़ा, सैणामानुरक माथ।

जीतू पटावै छानी, हम त्येरी बल्याई ल्यूंला॥

द्वी थानूका बीचों बीच य रूपसा डानि,

एकमा सरस्वती रहैंचा एकमा भवानी।

गाजनि घनैला घानी हम त्येरी बल्याई ल्यूंला॥

मैं छू हीरू डढोईक पीड़ैकि गढोई,

त्यर खुटां तब ल्येरूं यो पीड़ै कैं बटोई।

म्येरी बिनती जयै मानी हम त्येरी बल्याई ल्यूंला॥

– हीरा सिंह राणा

हिटो दर्शन कैं औंला

हिटो दर्शन कैं औंला

मानिला थानम है रौ छ्या भौत्तै चमत्कार।

भुली चुकी देवी-द्यप्त ऐगीं माँ का द्वार॥

हिटो दर्शना कै औंल, पूजा अर्चना कै औंल॥

श्री बद्रीनाथ ज्यूकौ पैल्ली छै आसण।

झांकरी का सैम नागदेव नंगार झण॥

नारसिंह देव ऐरैं शिवाका औतार।

हिटौ दर्शना कै औंल, पूजा अर्चना कै औंल॥

क्षेत्र पाल नौ गहाँ और ग्वलों ग्वेल दे राणी।

माँ का भवन में गाजमैं गायत्री की वाणी॥

ढूँढी बधाण देव बगैंल यॉ दूदैकी धार।

हिटौ दर्शना कै औंल, पूजा अर्चना कै औंल॥

आओ माँ का द्वार द्यखौ द्यप्तों ठका ठेल।

कत्यूरों की जिया ऐरैं चम्पावती ग्वेल॥

गुरु सजेपाल ज्यूकौं बाजौं बिजे सार।

हिटौ दर्शना कै औंल, पूजा अर्चना कै औंल॥

धाम देव-ब्रह्म देव कत्यूरौ वंशज।

रंगिली बैराठ माजा जाणि कै ऐ असज॥

आपण-अपण कुल देवों हैं करौ नमस्कार।

हिटौ दर्शना कै औंल, पूजा अर्चना कै औंल॥

सैणामानुर मनराल ‘नन्दन’ जुग जुग जी रया।

बिरूड़ी देवी द्यप्तों कैं जो न्यौती बै यॉ ल्यया॥

कै गछा नन्दन सींहा पीढ़ियों उद्धार।

हिटौ दर्शना कै औंल, पूजा अर्चना कै औंल॥

दान दिणी धनपती और सेवानिवृत भक्त।

माँ की स्यव करणियों हैं म्यहैं निछैं शब्द॥

जो लै आनी अर्ज लिबै माँ कैली उद्धार।

हिटौ दर्शना कै औंल, पूजा अर्चना कै औंल॥

जीणों-उद्धार बटी अब तक ज्य द्यौखौ।

द्वार बै सिंगार तक मैलै वस्सै ल्यखौ॥

लम्बी कथक छ्वट्टा आँखर मां हीरू गिदार।

हिटौ दर्शना कै औंल, पूजा अर्चना कै औंल॥

– हीरा सिंह राणा

जय मानिला मय्या

जय मानिला मय्या

ओ मय्या मानिला मय्या तेरी जै जै कारी।

माता सबों जीवनै की आस छा तिपारी॥

कुमाऊँ गढ़वाल और सारै दुनी मज,

बेल जस फैली गोछ आज त्यर सत॥

रछै तू दयालू सदा, दुखों कैं हरिछै,

सिंहासन छोड़ि बेर दरसन दिछै॥

हमरा सुणी छैं भौत त्यर दयादान,

करिछै सहाय दिछै मूरख कैं ज्ञान॥

राजी खुशी धरिछै तू अपण भक्तों कैं,

कोड़िनों कें काया दिछै नजर अन्धू कैं॥

टीकी रौ संसार त्यरौ सत मजी मय्या,

हरिछै दुखियों दुख पार कुछै नय्या॥

रहनी जो त्येरी आस तिकणी भजनी,

नौ लिनी स्ये उठी बेर सदा सुखी रनी॥

लीछै तू सेवा सबों की सुणीछै पुकार,

सिद्धि दिछै जो लै आनी त्यर दरवार॥

नौकरी व्यूपार में ऊ उन्नति करुछा,

राती ब्याव दुखी सदा हैसनै रहुँचा॥

– कुबेर सिंह कड़ाकोटी

न्है जानी दिन मास

न्है जानी दिन मास

न्है जानी दिन मास ऐ जैंछ यादा,

सना बय्याली सौ को उतपाता॥

सल्टीया बीरों की घर घर बाता,

गोरा अंग्रेजा तू छोड़ी दे राजा।

गौंना गौना माजी नडरा बाजा,

गोरा अंग्रेजा तू छोड़ी दे राजा॥

सन् बय्यालीसैकि जो चली आंधी,

हर गोविन्द पन्त बणी सल्टका गांधी।

खुमाड़क पुरुषोत्तम संड़ में संय्याती,

ल्हींबै छोड़ुल हम अपणि आजादी॥

सल्टक लोगों कौ सुणि बेर मेल,

एस.डी.एम. जॉनसैंल ख्यल यस खेल।

जौनसन पेशकार और घनस्यामा,

देघाट बै सल्टै हैंणि क य प्रस्थाना॥

क्वैरला खावम ऐ गय सिपाई,

पिपन बै बिणदेवैल तूतरी बजाई॥

बाजीगो रणसिंह बाजा नडरा,

चार पट्टी सल्टम है गे खबरा।

ल्ही बेर सिपाइ जौनसन ऐगो,

गौं गौं में सल्ट्यौ कौ एकमत हैगो॥

डंडुला गों मजि पुलिस ऐगे,

लालमणि कुटई कनमा नै गे।

हथबेड़ी लै गय हय गिरफ्तारा,

फिरि गोय जौनसन खुमाड़े धारा॥

रेवा का खावम पुलिस न्है गे,

गोविन्द ध्यानि परि हथबेड़ी लै गे।

खुमाड़ा गों मजि जौनसन आयौ,

नैनमणिल हात पारी लट्ठा उठायौ॥

खुमाड़ा ढैया में वादी गो घेरा,

गंगादत्त शास्त्री लै धमकाय जै बेरा।

हुकम दी जोनसनला गोई चले दी,

गडराम खिमदेवै कि लास बिछैदी॥

अगिल बै पुलिस हातों में गोली,

खेलण बट लाग खूनैकि होली।

द्री भे गय शमसाण द्री अस्पताला,

ही भरी आं अब ऐजांछ ख्याला॥

देवायला हैंणी जाण भैट कुघाती,

धनबीरा कुणसिंह ल खोली दी छाती।

बाबू कौ च्यौल छै मारा अंग्रेजा,

आपण देशम आपौंण राजा॥

मै क्ये बतों बतालौ इतिहासा,

यां लै रे बीरों की नामों की रास।

ही भरी औं जब याद ऐ जानी,

यौं खूनै बत्ती कै फूल चढ़ानी॥

– हीरा सिंह राणा